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अलौकिक समर्पण दिवस, शोभा दीदी के 60वें जन्मदिवस व पूनम बहन के प्रभु समर्पण की हुई गौरवमयी झलक
-प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में मनाया गया पावन अवसर, रंगारंग कार्यक्रमों व ब्रह्माभोज से गूंजा वातावरण
फर्रुखाबाद: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, फर्रुखाबाद (Farrukhabad) में रविवार को आध्यात्मिक उल्लास और दिव्यता के वातावरण में शोभा दीदी (Shobha Didi) का 60वां जन्मदिवस (birthday) और पूनम बहन का प्रभु समर्पण दिवस बड़े ही भव्य और भावनात्मक ढंग से मनाया गया। कार्यक्रम में समाज के अनेक गणमान्यजन जैसे संदीप राठौर, संजय गर्ग एवं सुरेंद्र पांडेय सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अपने 60वें जन्मदिवस पर संबोधित करते हुए शोभा दीदी ने कहा, “मेरे माता-पिता कितने धन्य थे जिन्होंने मुझे जन्म देकर एक नई दिशा की ओर प्रेरित किया। उन्होंने मेरे निर्णयों में हमेशा मेरा साथ दिया और मेरी इच्छाओं को सम्मान दिया। उनका मार्गदर्शन ही मेरी आत्मिक यात्रा की नींव बना।” उन्होंने आगे कहा कि यह संगम युग ईश्वर से जुड़ने का विशेष समय है, और वह चाहती हैं कि उनकी उपस्थिति इस युग में आत्म कल्याण के लिए बनी रहे।
पूनम बहन का ईश्वर समर्पण दिवस – “शिव को चुना जीवनसाथी के रूप में”
कार्यक्रम में पूनम बहन ने अपने 17 जून 2019 के जीवन के महत्वपूर्ण दिन को स्मरण करते हुए कहा, “वह दिन मेरे जीवन का सबसे पावन क्षण था जब मैंने परमात्मा शिव को अपना वर चुना और जीवन का सम्पूर्ण समर्पण कर दिया। तभी से मैं तन, मन, वचन और कर्म से ईश्वरीय सेवा में लगी हूं और सदा श्रीमत का पालन कर रही हूं।”
शोभा दीदी ने इस अवसर पर पूनम बहन की सराहना करते हुए कहा कि, “समर्पण आत्मा को शक्तिशाली बनाता है। ईश्वरीय सेवा में स्वयं को समर्पित कर देना ही सच्चे पुण्य का कार्य है। पूनम बहन का समर्पण यीशु-पार्वती विवाह की भांति है, जिसमें आत्मा (पार्वती) शिव से जुड़कर सर्वस्व अर्पण कर देती है।” इस शुभ अवसर पर सभी ने मिलकर केक काटकर दीदी के जन्मदिन का जश्न मनाया। बच्चों और युवाओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी, जिनमें नृत्य, भजन और आध्यात्मिक नाटक सम्मिलित थे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने ब्रह्माभोज का आनंद लिया।
इस पावन आयोजन में फर्रुखाबाद शहर व आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने समर्पण की दिव्यता, जीवन में ईश्वर के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और आत्मिक उन्नति के विचारों को आत्मसात किया। यह आयोजन आध्यात्मिक समर्पण, आत्मिक दृढ़ता और दिव्यता की अद्वितीय मिसाल बनकर सामने आया। शोभा दीदी और पूनम बहन की साधना से प्रेरणा लेकर युवा वर्ग भी ईश्वरीय मार्ग की ओर अग्रसर हो रहा है।

