-
Advertisement
वर्ष भर बाद भी नहीं सुलझी जलभराव की समस्या, किदवई नगर व शिवाजी नगर की जनता बेहाल
– 30 जून 2024 को विधायक के निरीक्षण के बाद भी नहीं हुई स्थायी व्यवस्था, बरसात में फिर डूबी गलियाँ
मोहम्मदाबाद (फर्रुखाबाद): पिछले वर्ष 30 जून को किदवई नगर और शिवाजी नगर (Shivaji Nagar) में जलभराव waterlogging) की समस्या को लेकर मोहल्लेवासियों द्वारा की गई शिकायत पर भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर भौतिक निरीक्षण किया था। समस्या के स्थायी समाधान हेतु निर्देश भी दिए गए थे, परंतु एक वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बारिश के शुरुआती दौर में ही मोहल्लों की गलियाँ एक बार फिर जलमग्न हो गई हैं। घरों में पानी घुसने लगा है और राहगीरों को निकलने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी प्रशासन की उदासीनता से आक्रोशित हैं। 30 जून 2024 को हुए निरीक्षण के दौरान विधायक नागेंद्र सिंह राठौर के साथ एडीएम फाइनेंस सुभाष प्रजापति, एसडीएम सदर गजराज सिंह, पीडब्ल्यूडी जेई उदय राजकुमार और नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी अखिलेश कुमार मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान विधायक ने ग्रामीण आर्यावर्त बैंक के पास स्थित बंद पुलिया को नाले से जोड़ने और मुख्य चौराहे पर संकरी पुलिया को चौड़ा करने के निर्देश दिए थे।
विकल्प के रूप में सड़क से 55 फुट जगह छोड़कर कच्चा नाला खोदने का प्रस्ताव भी सामने आया था। वहीं एडीएम फाइनेंस ने तत्काल अतिक्रमण हटाने की मुनादी करवा कर नालों की सफाई करवाने का आदेश भी अधिशासी अधिकारी को दिया था। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निरीक्षण के बाद उम्मीद जगी थी कि वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या का समाधान होगा। परंतु न तो अस्थायी नाला खोदा गया और न ही पुलिया के चौड़ीकरण अथवा सफाई का कोई कार्य हुआ। प्रशासन की निष्क्रियता का खामियाजा अब फिर से आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
बरसात शुरू होते ही गलियों में पानी भरने लगा है। किदवई नगर और शिवाजी नगर के लोगों का कहना है कि कई वर्षों से शिकायत की जा रही है, लेकिन नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामले को टालते रहे हैं। अब जब विधायक और उच्च अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर निर्देश दे चुके हैं, तब भी कार्य न होना लापरवाही और अकर्मण्यता का उदाहरण है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था हेतु तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य शुरू किया जाए और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

