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समीक्षा बैठकों में भाग ना लेना भी विद्युत में बाधा पहुंचाने जैसा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (Uttar Pradesh Power Corporation) एवं अन्य ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष डॉ आशीष कुमार गोयल ने कहा है कि समीक्षा बैठकों या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भाग न लेकर बहिष्कार करना भी विद्युत आपूर्ति (power supply) में व्यवधान पहुंचाने जैसा ही कार्य है। कॉरपोरेशन या डिस्कॉम स्तर पर जो भी समीक्षा बैठके की जाती हैं वे सब विद्युत (electricity) व्यवस्था एवं आपूर्ति को लेकर ही होती हैं। इसलिए ऐसा कोई कार्य न करिए जो विद्युत व्यवधान की श्रेणी में आता है।
अन्यथा मजबूरन कठोर कार्रवाई करनी पड़ेगी। आज सामग्री प्रबंधन एवं ट्रांसफार्मर वर्कशॉप की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि सेवा शर्तों आदि के लिए हम हमेशा वार्ता के लिए तैयार हैं। कोई भी संगठन आकर बात कर सकता है। लेकिन सरकार की नीति क्या हो यह तय करना संगठनों के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में कार्य बहिष्कार या हड़ताल जैसे कार्य करना उचित नहीं है ।
अध्यक्ष ने निर्देशित किया कि प्रदेश में ट्रॉली ट्रांसफार्मर सही रहे इसके लिए अधिकारी रेगुलर सजगता बरते। ट्रांस फार्मर क्षतिग्रस्त होने पर इन्हें लगाकर तत्काल आपूर्ति बहाल की जाए। लेकिन लंबे समय तक इन्हें लगाकर ना रखें।अधिकतम 48 घंटे में ट्राली ट्रांसफार्मर वहां से अन्यत्र भेज दिए जाएं। उन्होंने कहा कि भंडार गृहों पर सामग्री प्रबंधन बेहतर ढंग से की जाए जिससे सामग्री की कमी ना आए।
अध्यक्ष ने कहा कि भंडार केंद्रों पर अनावश्यक सामग्री समय से नीलम कर दी जाए जिससे सामग्री स्टोर करने के लिए स्थान की कमी ना रहे। अध्यक्ष ने कहा की कार्यशालाओं का कार्य और समयबद्ध तथा बेहतर हो जिससे सामग्री के क्रय और उनके रिपेयर में गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। डॉ आशीष गोयल ने कहा कि ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्तता में कमी आ रही है उसी अनुपात में कार्यशालाओं के खर्चों में भी कमी आनी चाहिए ।
उन्होंने कहा की आरडीएस एस योजना में जो भी कार्य कराए जाएं वही कराए जाएं जहां उनकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है । कार्य के बाद वहां सुधार दिखाई पड़े। उन्होंने निर्देशित किया की शक्ति भवन से वरिष्ठ अधिकारी भंडार केंद्रों और वर्कशॉप का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट पर सौंपे। शक्ति भवन में संपन्न इस समीक्षा बैठक में निदेशक वितरण सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे ।साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी वितरण निगमों के निदेशक तकनीकी जुड़े हुए थे।

